गणेश जी
श्री गणेश चालीसा
श्री गणपति का ध्यान धर, करूँ विनय कर जोड़।
विघ्न विनाशक कृपा करो, संकट देना छोड़॥
जय गणपति गुण ज्ञान निधाना।
प्रथम पूज्य तुम मंगल नाना॥
शिव गौरी के पुत्र दुलारे।
भक्तों के तुम सदा सहारे॥
गजमुख सुंदर रूप तुम्हारा।
देखत मिटे कष्ट सब सारा॥
एकदंत तुम नाम कहाए।
ज्ञान और शुभ बुद्धि दिलाए॥
मूषक वाहन शोभित भारी।
मोदक प्रिय हैं मंगलकारी॥
माथे सिंदूर तिलक मन भावे।
दर्शन से मन शांति पावे॥
चार भुजा में आयुध धारे...
विघ्न विनाशक कृपा करो, संकट देना छोड़॥
जय गणपति गुण ज्ञान निधाना।
प्रथम पूज्य तुम मंगल नाना॥
शिव गौरी के पुत्र दुलारे।
भक्तों के तुम सदा सहारे॥
गजमुख सुंदर रूप तुम्हारा।
देखत मिटे कष्ट सब सारा॥
एकदंत तुम नाम कहाए।
ज्ञान और शुभ बुद्धि दिलाए॥
मूषक वाहन शोभित भारी।
मोदक प्रिय हैं मंगलकारी॥
माथे सिंदूर तिलक मन भावे।
दर्शन से मन शांति पावे॥
चार भुजा में आयुध धारे...
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