शिव जी
श्री शिव चालीसा दोहा
श्रीगुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुर सुधार।शिव कृपा से हो सफल, जीवन का व्यवहार॥
जय गिरिजापति दीनदयाला।सदा करत संतों प्रतिपाला॥
भाल चंद्र और गंगाधारी।त्रिनेत्रधारी मंगलकारी॥
जटा मुकुट शोभा अति न्यारी।नाग लपेटे तन सुखकारी॥
डमरू ध्वनि जग को सुनाते।भक्तों के संकट हर जाते॥
त्रिशूल धरे कर में भारी।दुष्ट दलन हित लीला न्यारी॥
कैलाशपति करुणा सागर।भक्त जनों के तुम हितकर॥
नंदी वाहन सदा सुहावन।दर्शन पाकर मि...
जय गिरिजापति दीनदयाला।सदा करत संतों प्रतिपाला॥
भाल चंद्र और गंगाधारी।त्रिनेत्रधारी मंगलकारी॥
जटा मुकुट शोभा अति न्यारी।नाग लपेटे तन सुखकारी॥
डमरू ध्वनि जग को सुनाते।भक्तों के संकट हर जाते॥
त्रिशूल धरे कर में भारी।दुष्ट दलन हित लीला न्यारी॥
कैलाशपति करुणा सागर।भक्त जनों के तुम हितकर॥
नंदी वाहन सदा सुहावन।दर्शन पाकर मि...
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